साहब बीबी गुलाम

विमल मित्र द्वारा लिखित उपन्यास साहब बीबी गुलाम मात्र एक उपन्यास नहीं बल्कि कलकत्ते शहर की महागाथा है। कलकत्त्ता(अब कोलकाता) कैसे बसा, कैसे उजड़ा आदि बातों का वर्णन करता ये उपन्यास सामन्ती परिवेश की पड़ताल करता है।


उपन्यास की पृष्ठभूमि ब्रिटिश काल की है जब अंग्रेज आ तो गये थे पर सत्ता के सारे केंद्र बदलने के बजाय सिर्फ समीकरण बदले थे। सामान्य जनता पर अभी भी सामन्ती हंटर पूर्ववत ही चल रहा था। पर अब सामंतों के भी दिन अच्छे नहीं रहे थे। बदलती तकनीक के साथ वो खुद को सहज नहीं पाते थे। समय के साथ परिवर्तित होने के स्थान पर वो अपनी पुरानी शानोशौकत के मद में चूर थे और यह भाँप ही नहीं पा रहे थे कि समय कितनी तेजी से बदल रहा है।
इस कथा के सूत्रधार हैं ओवरसीयर भूतनाथ जो वर्तमान में कलकत्ते में निर्माण कार्य में रत हैं और इस शहर से जुड़ी उनकी पुरानी स्मृतियां बार बार उन्हें स्मृति लोक में धकेल देती हैं।


नदिया जिले से किसी जमाने में दो वक्त की रोटी कमाने आया भोला भाला भूतनाथ साहबों की हवेली के वैभव का गवाह है। उसे याद आती है चौधरियों की आलीशान हवेली,  वहाँ होने वाले तरह तरह के आयोजन, कबूतरबाजी, कुत्तों का ब्याह, गुड़ियों का ब्याह, कोठों की महफ़िलों में जाते चौधरी खानदान के पुरुष, ये सब जीवंत हो उठता है उसकी आँखों के सामने। कैसे किसानों को लगान न चुका पाने पर दण्ड मिलता था, जमीनें हड़प ली जाती थीं और कैसे वही चौधरी गणिकाओं पर दिल खोल कर खर्च करते थे।


फिर वो याद करता हैं हवेली में काम करने वाले नौकरों को और छोटी बहू को।


छोटी बहू, इस उपन्यास का आकर्षण, इस उपन्यास की परिणिति, सब वही तो है। भूतनाथ गुलामों की श्रेणी में आता था, साहबों के पड़ोस में रहता था, बीबी(छोटी बहू) का कृपापात्र था। छोटी बहू, जिसको कोई देख भी न सकता था, उसका भूतनाथ से क्या रिश्ता था, भूतनाथ को छोटी बहू से कैसा लगाव था, यह सब तो आपको उपन्यास पढ़कर ही पता चलेगा।
जवा कौन है? भूतनाथ और जवा के बीच क्या सम्बन्ध है? मोहिनी सिंदूर का क्या किस्सा है? यह सारे किस्से कैसे छोटी बहू से जुड़ते हैं? कैसे भूतनाथ हर मान अपमान के बाद भी छोटी बहू के लिये हमेशा सहृदयता का परिचय देता है? हवेली के नौकरों और हवेली के मालिकों की दुनिया कितनी अलग है? यह सब जानने के लिये विमल मित्र की इस कृति को अवश्य पढ़ें।


उपन्यास का लिंक साथ में दिया गया है।

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